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RTI कानून का खुला मज़ाक! रायपुर नगर निगम में 10 जोनों की अफरातफरी, 59 कर्मचारियों का वेतन दबाया गया

कर्मचारियों के हक पर डाका, सूचना अधिकार की हत्या — प्रदुमन शर्मा (प्रदेश महासचिव, IHRPC)

ज़ोहेब खान………रायपुर। नगर निगम रायपुर में सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम को ताक पर रखकर प्रशासनिक मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग (IHRPC) के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव श्री प्रदुमन शर्मा ने निगम की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मुख्यालय से लेकर सभी 10 जोनों तक RTI कानून का सरेआम मखौल उड़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर 59 कंप्यूटर ऑपरेटरों का वेतन महीनों से दबाया गया है।

श्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने जनहित में प्लेसमेंट कर्मचारियों से जुड़ी अहम जानकारियां RTI के तहत मांगी थीं, लेकिन जानकारी देने के बजाय नगर निगम प्रशासन ने आवेदन को एक जोन से दूसरे जोन में घुमाना शुरू कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि RTI अधिनियम की धारा 6(3) का दुरुपयोग कर आवेदक को जानबूझकर भटकाया जा रहा है।

“नगर निगम रायपुर एक ही सार्वजनिक प्राधिकरण है। मुख्यालय की जिम्मेदारी बनती है कि वह सभी जोनों से सूचना एकत्र कर उपलब्ध कराए। आवेदक को 10 जोनों में दौड़ाना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि पारदर्शिता की खुली हत्या है।”
— प्रदुमन शर्मा

वेतन संकट: प्रशासन–एजेंसी की खींचतान में कर्मचारी पिसे

दस्तावेजों से सामने आया है कि नगर निगम और प्लेसमेंट एजेंसी ‘अंशरायन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ के बीच डेटा साझा करने को लेकर गंभीर गतिरोध बना हुआ है। इसी प्रशासनिक विफलता के चलते 59 कंप्यूटर ऑपरेटरों का दिसंबर माह का वेतन अब तक लंबित है।

एक ओर एजेंसी डेटा न मिलने का हवाला दे रही है, तो दूसरी ओर निगम अनुबंध का बहाना बना रहा है। इस आपसी टकराव में कर्मचारियों के EPF और ESIC जैसे मूलभूत अधिकार भी अधर में लटक गए हैं।

तीन बड़ी मांगें

श्री प्रदुमन शर्मा ने नगर निगम प्रशासन से स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि—

1. 59 कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन 24 घंटे के भीतर खातों में भेजा जाए।

2. RTI की संपूर्ण जानकारी मुख्यालय स्तर पर उपलब्ध कराई जाए, न कि आवेदक को 10 जोनों में भटकाया जाए।

3. RTI को गुमराह करने और कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।

राज्य सूचना आयोग जाने की चेतावनी

श्री शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा—

“प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी भी कर्मचारी को उसके हक के वेतन से वंचित रखना सीधा अन्याय है। रायपुर नगर निगम में पारदर्शिता नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। भ्रष्टाचार और लापरवाही चरम पर है। RTI कानून का जो मज़ाक बनाया जा रहा है, उसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग से की जाएगी। यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो उच्च स्तरीय जांच और कानूनी कार्रवाई तय है।”

अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग ने साफ किया है कि वह इस पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखे हुए है।

 

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