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TIFR के सेवानिवृत्त अधिकारी से ₹1.27 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी CBI–IPS बनकर डराने वाले गिरोह का एक आरोपी गिरफ्तार

ख़बर no.1 न्यूज़…………मुंबई। पश्चिमी क्षेत्र की साइबर पुलिस ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के एक बुजुर्ग सेवानिवृत्त अधिकारी से ₹1.27 करोड़ की ठगी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान परशुराम दशरथ जगताप के रूप में हुई है, जिसे बांद्रा की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार, इस साइबर धोखाधड़ी में ठगों ने खुद को सीबीआई और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया। आरोप है कि जगताप ने ठगी की रकम के लेनदेन के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध कराई और बदले में कमीशन लिया।

पीड़ित मनमोहन जौहरी (85), अंधेरी के जुहू–वर्सोवा लिंक रोड क्षेत्र में रहने वाले हैं और कोलाबा स्थित TIFR से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। 30 अक्टूबर को उन्हें संदीप राव नामक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को बेंगलुरु के अशोक नगर पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार आरोपी के पास से जौहरी की एटीएम पासबुक मिली है और उनके खाते में ₹75 लाख के अवैध लेनदेन हुए हैं।

ठगों ने उन्हें गिरफ्तारी, परिवार पर हमले और बेटे की नौकरी जाने की धमकी दी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को सीबीआई अधिकारी दया नायक बताकर फर्जी एफआईआर और गिरफ्तारी वारंट दिखाए। जाली सरकारी दस्तावेज भेजकर बैंक खाते फ्रीज करने की धमकी दी गई, जिससे डरकर जौहरी ने अलग-अलग खातों में कुल ₹1.27 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।

साइबर पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

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