छत्तीसगढ़ प्रदेश

छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में ओबीसी वर्ग का नया अध्यक्ष बनने की संभावना

रायपुर. छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही अब प्रदेश के भाजपा संगठन में भी बड़ा फेरबदल होगा। विधानसभा चुनाव में प्रदेशाध्यक्ष अरुण साव के साथ तीन महामंत्री और तीन उपाध्यक्ष भी चुनाव जीत गए हैं। इनके स्थान पर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि ओबीसी अध्यक्ष के स्थान पर ओबीसी वर्ग से ही अध्यक्ष बनाया जाएगा। पाटन से चुनाव हारने वाले दुर्ग के सांसद विजय बघेल को अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार भी बताया जा रहा है। इसी के साथ ओबीसी वर्ग से पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल भी हैं। कुछ और भी नाम हैं।

छत्तीसगढ़ के चुनाव के लिए इस बार भाजपा का राष्ट्रीय संगठन बहुत ज्यादा ही गंभीर रहा। यही वजह है कि यहां पर चुनाव की कमान संभालने का काम खुद केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने किया। उनके चुनाव की कमान संभालने के बाद यहां पर बड़े चौंकाने वाले फैसले हुए। इसके पीछे का कारण यह रहा कि भाजपा काेई भी गलती किए बिना इस बार चुनाव जीतना चाहती थी और वह चुनाव जीत भी गई।

विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बिलासपुर के सांसद अरुण साव काे लोरमी से टिकट दिया गया था और वे वहां से भारी मतों से जीते। चुनाव जीतने के बाद वे मुख्यमंत्री पद के भी दावेदार थे, लेकिन उनको यह पद तो नहीं मिला, लेकिन उनको डिप्टी सीएम बनाया जा रहा है। इसी के साथ अब उनकी प्रदेशाध्यक्ष पद से विदाई तय है। उनके स्थान पर अब नए अध्यक्ष की तलाश प्रारंभ हो गई है। प्रदेश

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने प्रदेशाध्यक्ष अरुण साव के साथ तीनों महामंत्री केदार कश्यप काे नारायणपुर, विजय शर्मा को कवर्धा और ओपी चौधरी को रायगढ़ से चुनाव जीते हैं। ऐसा पहली बार हुआ जब संगठन के तीनों महामंत्री चुनाव लड़े और जीते भी। इसी के साथ प्रदेश मंत्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव काे कोटा से मैदान में उतारा गया लेकिन वे चुनाव हार गए। चार उपाध्यक्षों सरला काेसरिया को सरायपाली, उधेश्वरी पैकरा काे सामरी लखन देवांगन को कोरबा और मोतीलाल साहू को रायपुर ग्रामीण से चुनाव लड़ाया गया। इसमें से सरला कोसरिया को छोड़कर बाकी तीनों उपाध्यक्ष चुनाव जीते हैं। अब तीन नए उपाध्यक्ष भी बनाए जाएंगे।

भाजपा के चुनाव जीतने के बाद अब नए पदाधिकारियों की तलाश अभी से प्रारंभ हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग चाहते हैं कि अरुण साव की तरह की नया अध्यक्ष भी आरएसएस की पृष्ठभूमि वाला हो। इसी के साथ यह भी कहा जा रहा है कि अब महामंत्री और उपाध्यक्ष के पदों पर आरएसएस से जुड़े लोगों को अहमियत दी जाए। इसके अलावा जिला अध्यक्षों के पदों पर भी आरएसएस के लोग अपने से जुड़े लोगों को पदों पर काबिज होते देखना चाहते हैं।

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