लेख-आलेख

स्पेशल पेज ,,,,रवि के गुरुबक्षाणी

स्माइल प्लीज

श्रीधर: मेरे लिएकोई खत है ?
पोस्टमेन: आपकानाम क्या है ?
श्रीधर: वह लिफ़ाफ़े पर जरूर लिखा होगा.
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मनीषा अपने तोते को बोलना सिखा रही है।
मेरे पीछे बोलोः
‘‘मैं टहल सकता हूँ।’’
‘‘मैं टहल सकता हूँ।’’
‘‘मैं बोल सकता हूँ।’’
‘‘मैं बोल सकता हूँ।’’
‘‘मैं उड़ सकता हूँ।’’
‘‘यह झूठ है।’’
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मुसाफ़िर: इस टाइमटेबलका क्या उपयोग है ? ट्रेन तो कभी भी समय पर नहीं आती।
रेल्वे अधिकारी: यदि ये टाइमटेबल ना हो तो आप को पता कैसे लगेगा कि ट्रेन देर से आ रही है ?
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बॉस: व्हेर वर यु बॉर्न ?
सरदारजी: ओये पंजाब।
बॉस: विच पार्ट ?
सरदारजी: ओये , क्या विच पार्ट ? होल बॉडी बॉर्न इन पंजाब.
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संता ऑटो में से एक व्हील निकालने में व्यस्त था!
बंता (संता से): तुम अपनी ऑटो में से व्हील क्यों निकाल रहे हो ?
संता: तुम ने पढ़ा नहीं ? ‘ पार्किंग सिर्फ़ दो पहिया वाहनों के लिए ‘ .
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महिला: यह मेरी ट्रेन है ?
स्टेशन मास्टर: नहीं , यह तो रेल्वे की है।

प्रस्तुति रवि के  गुरुबक्षाणी                  

सामने प्रश्नावली है एक भी उत्तर नहीं है
घट निराशा के भरे हैं,आस अंजुरि भर नहीं है

ज़िंदगी होकर समंदर आजमाना चाहती है
हाथ से पतवार लेकिन छूट जाना चाहती है
दो विकल्पों में चुनें क्या द्वंद्व की मुश्किल घड़ी है
तत्व चिंतन के समय पर चेतना मूर्छित पड़ी है

तप्त मन,शीतल बदन है,कंठ में भी स्वर नहीं है
सामने प्रश्नावली है…….

लक्ष्य औ कर्तव्य में टकराव होने लग गया है
उम्र ने तोड़ा कवच,अब घाव होने लग गया है
बँट चुकी है ज़िंदगी,बदलाव होने लग गया है
आपका ही आप से अलगाव होने लग गया है

धैर्य धरिये!इस समय कुछ धैर्य से बढ़कर नहीं है
सामने प्रश्नावली है…….

यह प्रबलतम ताप ही व्यक्तित्व का कुंदन गढ़ेगा
तब कहीं इतिहास भी अस्तित्व को अंकित करेगा
तम प्रगति के पंथ पर है!स्वप्न को दिनमान कर लो
मत हटो कर्तव्य से सँग लक्ष्य का संधान कर लो

कर्म के स्वर्णिम क्षणों में अश्रु को अवसर नहीं है
सामने प्रश्नावली है…….

~ रुद्र प्रताप ‘रुद्र’

 

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