नई दिल्ली (IMNB). पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए केन्द्रीय मंत्रालयों के सकल बजटीय सहायता से व्यय की स्थिति पर तिमाही समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सभी 8 उत्तर पूर्वी राज्यों और 14 केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मंत्री ने मंत्रालयों से चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले धनराशि के 100 फीसदी उपयोग का लक्ष्य निर्धारित करने का अनुरोध किया। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्रालयों को राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रूप से व्यय क्षमता में चुनौतियों की पहचान करने और त्वरित कार्रवाई करने के लिए समन्वय स्थापित करना चाहिए। इसके अलावा श्री किशन रेड्डी ने कहा कि समय पर धनराशि की प्राप्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ परियोजनाओं को उनके प्रभाव और समाज के लाभ को ध्यान में रखते हुए विवेकपूर्ण ढंग से शुरू किया जाना चाहिए।
मंत्री ने आगे राज्य सरकारों को आवंटित धनराशि का व्यय सुनिश्चित करने, उपयोगिता प्रमाणपत्रों को समय पर जमा करने और भूमि आवंटन आदि से संबंधित स्थानीय मुद्दों के सक्रिय समाधान को सुनिश्चित करने के लिए कहा। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकारों से 10 फीसदी सकल बजटीय सहायता का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों के पास गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव जमा करने का भी अनुरोध किया।
श्री जी किशन रेड्डी ने आगे राज्य सरकारों को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच के अनुरूप उत्तर पूर्वी राज्यों का विकास एक प्रमुख प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया गया है कि इन राज्यों की वृद्धि व विकास के रास्ते में कोई वित्तीय बाधा न हो।
इसके अलावा श्री किशन रेड्डी जी ने राज्य सरकारों से कई केंद्रीय क्षेत्र की कल्याणकारी योजनाओं के दायरे को बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरे क्षेत्र में अभियान संचालित करने का भी आह्वाहन किया कि कोई योग्य लाभार्थी पीछे छूट न जाए।

उन्होंने आगे कहा कि 2023-24 के बजटीय आवंटन में 2022-23 के बजटीय आवंटन की तुलना में 110 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो उत्तर पूर्वी क्षेत्र के सुदूर स्थान तक के विकास को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व संकल्प को और अधिक मजबूत करता है।
मंत्री ने केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों से अपने प्रयासों में अधिक निरंतरता और समन्वय लाने के लिए उत्तर पूर्वी राज्यों में स्थापित की नई क्षेत्र इकाइयों को भी इनमें शामिल करने का अनुरोध किया।
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