कवर्धा ‘‘सखी’’ वन स्टाॅप सेंटर विक्षिप्त महिलाअेां का कर रही पुनर्वास
किसी भी प्रकार की हिंसा से पीडि़त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही छत के नीचे अस्थायी आश्रय देने के साथ पुलिस, विधिक सहायता, चिकित्सा सुविधा, मनेावैज्ञानिक परामर्श की सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ‘‘सखी’’ वन स्टाॅप सेंटर 08 मार्च 2017 में खोला गया है। पीडि़त महिलाओं एवं बालिकाओं को सुविधा उपलब्ध कराने हेतु सेवाप्रदाताओं की नियुक्ति की गयी है। इसके अलावा प्रतिनियुक्ति आधार पर 03 महिला नगर सैनिक, 01 ए.एन.एम. एवं 01 पैरालीगल वाॅलिन्टियर की सुविधा ली जा रही है। ‘‘सखी’’ वन स्टाॅप सेंटर को प्राप्त प्रकरण में सबसे अधिक घरेलू हिंसा से प्रकरण सामने आए है। घरेलू हिंसा के साथ दहेज प्रताड़ना, मानसिक प्रताड़ना, प्रेम संबंध, दैहिक शोषण, धोखाधड़ी, साइबर अपराध, व्यक्तिगत विवाद, मानसिक विक्षिप्तता, टोनही प्रताड़ना, संपत्ति विवाद जैसे अनेक मामले सामने आए है। सखी ’’वन स्टाॅप सेंटर’’ द्वारा मानसिक रुप से विक्षिप्त महिलाओं का ईलाज करा कर उनका उचित पुनर्वास किया जा रहा है। इसीतरह दिनांक 25.01.2023 को सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक जिला कबीरधाम द्वारा विक्षिप्त महिला उम्र लगभग 23 वर्ष, को 108 वाहन के माध्यम से सुबह 07 बजे बाएं हाथ में फ्रेक्चर होने के कारण जिला चिकित्सालय कबीरधाम में भर्ती कराए जाने, चिकित्सक के निरीक्षण परीक्षण व शारीरिक उपचार पश्चात् उन्हे मनोरोग उपचार की आवश्यकता होने के कारण उन्हे पुनर्वास करने की के संबंध में अग्रिम कार्यवाही करने हेतु लेख किया गया है। महिला से बात करने पर ज्ञात हुआ कि महिला को पूर्व में उसके परिजन द्वारा मानसिक ईलाज हेतु राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी बिलासपुर (छ0ग0) भेजा गया था, पुनः उसके मानसिक स्थिति मे सुधार नही होने के कारण ‘‘सखी’’ वन स्टाॅप सेंटर जिला-कबीरधाम द्वारा दिनांक 01.06.2022 को रिम्स रायपुर (छ0ग0) भेजा गया। ईलाज उपरांत डिस्चार्ज कराया गया किंतु महिला के परिजनों के द्वारा उसके दवाईयों की व्यवस्था लगातार नही करने, उसके भोजन एवं अन्य दैनिक आवश्यकता की पूर्ति नही करने, अभाव पूर्ण जीवन होने के कारण उसके मानसिक स्थिति पर विपरीत असर हो रहा है, महिला के परिजनों द्वारा उसके साथ मारपीट कर महिला एवं उसके दुधमुहें बच्चे को घर से निकालने का मामला सामने आया। सखी वन स्टाॅप सेंटर द्वारा महिला के परिजन से संपर्क किया गया तथा परिजनों को महिला एवं उसके दुधमूहें बच्चे को साथ रखने की सलाह दिया गया किंतु महिला के परिजनों द्वारा उसे अपने साथ रखने से मना कर दिया गया साथ ही महिला द्वारा अपने परिजनोे के साथ रहने से मना किया गया। महिला अपने परिजनों के साथ रहने में असुरक्षित महसूस कर रही थी। ऐसे में महिला के मानसिक ईलाज के साथ-साथ उसके आश्रय की भी समस्या सामने आयी। जिसके पश्चात् महिला एवं उसके दुधमूहें बच्चे को कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार समाज कल्याण विभाग जिला बालेाद द्वारा संचालित घरौंदा में आश्रय दिया गया, जहां महिला एवं उसके नाबालिक बच्चे को आश्रय देने के साथ ही साथ समय-समय पर देखभाल, अनुश्रवण एवं चिकित्सकीय सहायता प्रदाय किया जाएगा। सेंटर के समक्ष 2017 से अब तक मानसिक विक्षिप्तता के कुल 47 प्रकरण प्राप्त हुए है, जिन्हे ‘‘सखी’’ वन स्टाॅप सेंटर द्वारा राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी बिलासपुर, रिम्स रायपुर अथवा अन्य स्थानो पर भेजा जाता है। ईलाज उपरांत ठीक होने पर महिला को उनके परिजनों, अथवा अन्य किसी संस्था में भेज कर उसका पूनर्वास किया जाता है साथ ही उनका लगातार फाॅलोअप कर उनके स्वास्थ्य, दवाईयों की जानकारी ली जाती है।