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योग के आदि प्रवर्तक महायोगी गुरु गोरख नाथ,कवर्धा सोनपुरी में 21 जून विश्व योग दिवस पर नाथ संप्रदाय करेगा योग अभ्यास प्रदर्शन

योग के आदि प्रवर्तक भगवान आदिनाथ महायोगी गुरु गोरखनाथ जी के रूप में प्रकट होकर आम जनमानस को योग के बारे में समझाते हुए गोरक्ष शतक ग्रंथ में कहते हैं कि” द्विज सेवित साखस्य श्रुति कल् पतरो: फलम्। शमनम् भवतापस्य योगं भजत सत्तमा:।। अर्थात वेद कल्पतरु है जिस तरह कल्पतरु की शाखाएं पक्षियों के आश्रय स्थान होते हैं इसी तरह विद्वानों द्वारा वेद की शाखाओं का परिशीलन किया जाता है वेद रूपी कल्पतरू का फल योग है। हे सज्जनों इसका सेवन करो यह योग संसार के त्रयताप का समन कर देता है। नाथ संप्रदाय के अनुयाई विश्व योग दिवस के अवसर पर गुरु गोरक्षनाथ मंदिर सोनपुरी रानी सागर में प्रातः काल से ही नाथ सिद्ध योग का अभ्यास एवं प्रदर्शन करेंगे। नाथ संप्रदाय में योग गुरु मार्गदर्शन में किया जाना अपेक्षित रहता है इसलिए अवधूत योगी अतिंद्रनाथ जी महाराज के शुभ मार्गदर्शन मे एवं नाथ योगी महासभा के राष्ट्रीय प्रचार प्रसार प्रमुख परम पूज्य महंत डॉ विलास नाथ योगी जीके आशीर्वाद से नाथ संप्रदाय के गृहस्थ योगी योग साधना करते रहे हैं। गुरु गोरक्षनाथ जी ने अपनी गोरख वाणी में कहां है कि” पवन ही जोग पवन ही भोग, पवन ही हरै छत्तीसों रोग। या पवन का कोई जाने भेव, सो आपे करता आपै देव। अर्थात पवन प्राण के संयम से ही नाड़ियों का मल शोधन होता है शरीर की शक्ति बनी रहती है मन संयमित और स्थिर रहता है प्राण के चेतना में स्थिर हो जाने पर योगी सारी सिद्धियों को वश में कर लेता है। भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी ने गोरक्ष शतक योग बीज विवेक मार्तंड सिद्ध सिद्धांत पद्धति इत्यादि ग्रंथों में योग प्राणायाम आसन ध्यान समाधि इत्यादि विषयों पर विशेष प्रकार डाला है। योग साधना विशेष तौर पर गुरु कृपा से ही सिद्ध होती है इसलिए नाथ संप्रदाय गुरु शिष्य परंपरा का अविछिन्न प्रवाही परंपरा रही है। योग दिवस के अवसर

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