छत्तीसगढ़ प्रदेश

छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के चुनाव में इस बार होगा बड़ा घमासान

रायपुर. छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के चुनाव में इस बार बड़ा घमासान हाेने के पूरे आसार है। करीब डेढ़ साल विलंब से अब जाकर नए साल में सात जनवरी को राजधानी रायपुर में चुनाव होगा। इस बार एक वर्ग का वर्चस्व समाप्त करने के लिए कुछ लाेग चुनावी मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुके हैं। ऐसे में तय माना जा रहा है कि इस बार मतदान हाेगा ही।

एसोसिएशन के इतिहास में करीब एक दशक पहले बिलासपुर में हुए चुनाव में मतदान की स्थिति बनी थी, अन्यथा आमतौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चुनाव निर्विरोध हो जाता है। इस बार जो स्थिति बन रही है उससे मतदान होना तय है। अध्यक्ष पद के लिए बिलासपुर से भी इस बार दावा सामने आ रहा है। इसी के साथ रायपुर के भी कुछ पदाधिकारी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। अन्य शहरों के कारोबारी भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इस बार आपसी सहमति के आसार कम नजर आ रहे हैं।

एसोसिएशन के तीन पदों अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष का चयन प्रदेश भर के 60 सराफा संघों के 180 पदाधिकारी मतदाता करेंगे। इसके अलावा और किसी को मतदान का अधिकारी नहीं होगा। मतदाता करने वाले संघों के लिए यह जरूरी होगा कि वे शुल्क जमा कर दें। शुल्क जमा न करने वाले संघों के पदाधिकारियों को मतदान से वंचित होना पड़ेगा। इसी के साथ संविधान में बदलाव के लिए भी आम सभा में कुछ प्रस्ताव लाने की तैयारी है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो संभव है कि इस बार महज अध्यक्ष का ही चुनाव हो।

प्रदेश के तीन दशक से ज्यादा पुराने छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के चुनाव में सीधे सदस्य को मतदान का अधिकार नहीं होता है। इसमें प्रदेश के जो भी संघ हैं उनके तीन पदाधिकारियों अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को ही मतदान का अधिकार रहता है। संघ बनाने के लिए यह जरूरी है जिस शहर में संघ बनाया जा रहा है वहां पर कम से कम सात सराफा कारोबारी हों। अगर ऐसा नहीं है तो आस-पास के शहर, गांव से भी दूसरे कारोबारियों को मिलाकर संघ बनाया जा सकता है। प्रदेश में इस समय 60 स्थानों पर संघ हैं। इन संघों के ही पदाधिकारियों को मतदान करने का मौका मिलेगा।

एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार चुनाव वाले दिन चुनाव से पहले होने वाली आमसभा में तीन पदों के स्थान पर एक ही पद अध्यक्ष का ही चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसी के साथ कार्यकाल को भी तीन के स्थान पर पांच साल का किए जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। अगर सभी की सहमति हुई तो इसी बार से ही एक ही पद की चुनाव होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button