महिला पत्रकार व साथियो के साथ मारपीट और अवैध कबाड़ कारोबार मामले में पुलिस प्रशासन पर सवाल, महिला आयोग तक पहुंचा मामला

खबर No1…….रायपुर। राजधानी रायपुर में महिला पत्रकार और उनके साथियों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार का मामला अब महिला आयोग तक पहुंच गया है। यह घटना 16 अक्टूबर 2024 की है, जब महिला पत्रकार अपने सहयोगियों के साथ एक अवैध लोहे का कारोबार चलाने वाले कबाड़ी लल्ली सिंह (सरदार) की गतिविधियों की रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई।

रायपुर के उरला थाने में 16 तारीख को दिए गए शिकायत पत्र की पावती 21 अक्टूबर को मिली, लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में उरला थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर पर जांच में देरी और सबूत मिटाने का आरोप लगा है। पत्रकारों का आरोप है कि थाना प्रभारी ने जानबूझकर कार्यवाही में देरी की, जिससे आरोपी को सबूत मिटाने का मौका मिला।
पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप
मामला पुलिस अधीक्षक और रायपुर के पुलिस महानिरीक्षक के संज्ञान में लाने के बाद भी कार्रवाई ठप है। एडिशनल एसपी लखन पटले ने पीड़ितों को बयान दर्ज करने के लिए सिविल लाइंस थाना बुलाया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अब महिला आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और शिकायत में उरला थाना प्रभारी और नगर पुलिस अधीक्षक खमतराई प्रशिक्षु आईपीएस अमन कुमार झा पर भी कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया गया है।
प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा पर खतरा
प्रदेश में पत्रकारों के खिलाफ हो रही पुलिसिया कार्यवाही और उन पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर प्रेस एंड मीडिया वेलफ़ेयर एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र जायसवाल ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को घर से बाहर निकलकर रिपोर्टिंग करने के बजाय जंग लड़ने जैसा महसूस होता है। रायपुर से लेकर सरगुजा और बस्तर तक पत्रकारों पर हमले और झूठे मामलों में फंसाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
इस मामले ने प्रदेश के पत्रकारों को एकजुट कर दिया है। कई संगठन और पत्रकार संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन और सरकार ने इस मामले में उचित कार्यवाही नहीं की, तो बड़े आंदोलन का सामना करना