ख़बर No1…….मुंबई, ब्यूरो। साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए विस्फोट मामले में आज विशेष एनआईए अदालत फैसला सुनाएगी। इस बहुचर्चित मामले में पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सात प्रमुख आरोपी शामिल हैं, जिन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम – UAPA और भारतीय दंड संहिता – IPC की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।
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मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसे बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया। दस साल बाद, अक्टूबर 2018 में अदालत ने सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
मुख्य आरोपी और उन पर लगे आरोप:
प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर आरोप है कि धमाके में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल उन्हीं के नाम पर थी।
ले. कर्नल प्रसाद पुरोहित पर विस्फोटकों की आपूर्ति और हमले की योजना का आरोप है।
मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय पर दक्षिणपंथी संगठन ‘अभिनव भारत’ से जुड़ाव और योजना बैठकों में भागीदारी का आरोप है।
अजय राहिरकर पर साजिश के लिए आर्थिक सहायता देने का आरोप है।
स्वयंभू धर्मगुरु सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी अमृतानंद पर वैचारिक समर्थन देने का आरोप है।
सुधाकर चतुर्वेदी पर विस्फोटक रखने और
समीर कुलकर्णी पर योजना बैठकों में शामिल होने का आरोप है।
इन सभी पर साजिश, हत्या और आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता जैसे गंभीर अपराधों का आरोप है।
इस मामले को लेकर देशभर की निगाहें आज अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं। यह फैसला भारत की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, खासकर आतंकवाद और चरमपंथ से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को लेकर।
(अधिक जानकारी फैसले के बाद अद्यतन की जाएगी)