वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की बेबाक कलम…हत्या अतीक की और हत्या साधुओं की विलाप विपक्ष का, रूख आम जनता का
विडम्बना…
दो साल पहले पालघर महाराष्ट्र में एक दुखद घटना हुई थी जिसमें दो साधु किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गुजरात जा रहे थे। लेकिन कोरोना के कारण हाईवे रोड से न जाकर गांव के रास्ते जाने का निर्णय लिया। गांव के रास्ते जाते समय उनका सामना वनविभाग की टीम से हुआ जहां ये अफवाह उड़ गयी कि ये लोग बच्चा चोर हैं। इस बात से गांववालों ने उन्हें घेर लिया। तब वन विभाग उनकी गाड़ी को लेकर उन्हें थाने ले आए। लेकिन भीड़ ने थाने को घेर लिया और अंततः तीन लोगों को लाठी डण्डों से पीट-पीटकर मार डाला था।
मरा शैतान
इनका गला भर आया

इस बार एक साधु की नहीं एक शैतान की हत्या हुई है। अतीक अहमद किसी शैतान से कम नहीं कहा जा सकता। सहज हत्याएं, फिरौती, जमीन हड़पना, आतंक फैलाना यानि ऐसा कोई पाप, ऐसा कोई कानूनी अपराध नहीं है जिसे करने से उसे परहेज हो।
‘वन्स अप आॅन एक टाईम इन मुम्बई’ फिल्म में अपराधी सुल्तान मिर्ज़ा का एक धांसू डायलाॅग कुछ इस टाईप का है कि ‘मै वो काम करता हूं जो कानून के खिलाफ हो वो नहीं जो ईमान के खिलाफ हो’। लेकिन यहां तो बस एक ही उसूल था कि पैसा आना चाहिये, आतंक कायम रहना चाहिये। फिर इसके लिये जो भी करना हो करो। चाहे वो कानून के खिलाफ हो या कुदरत के। और देेखिये कुदरत के खिलाफ काम करते हुए कुदरत ने ही उसे कैसा धंसा दिया। सिर्फ दो माह लगा, मात्र दो माह में संपत्ति खत्म, साम्राज्य खत्म, सहयोगी खत्म, बेटा खत्म और फिर खुद भी खत्म। पूरी की पूरी कहानी खत्म।
अतीक के सर सैकड़ों खून हैं
मरने से उसके प्रदेश में सुकून है
उत्तरप्रदेश ही नहीं सारे देश में खुशी, संतोष, सुकून है इस हादसे से। इस घटना को बड़े ही आदर भाव के साथ देखा जा रहा है। माफिया को खत्म करने की इस मुहिम के लिये योगी आदित्यनाथ के प्रति जनता के मन में सम्मान बढ़ गया है।
लेकिन कुछ दुष्ट लोग इस पर माथा पीट रहे हैं। इन दिलजले लोगों की चीखें निकल रही हैं एक शैतान के मरने पर। ताज्जुब है कि दो साल पहले दो साधुओं और एक आम आदमी की नृशंस हत्या पर इन लोगों को मानवता याद नहीं आई थी अब एक शैतान की मौत से बौखलाए नज़र आ रहे हैं। कानून और मानवता की दुहाई दे रहे हैं। धिक्कार है ऐसे लोगों पर। ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनके किसी सगे का मर्डर हो गया है…. ।
असर नहीं दिखेगा
इस बेशर्म विरोध का
ये बात साफ तौर पर समझ में आती है कि एक ही पीड़ा है कि मरने वाले सारे उनके समर्थक थे और इन्होंने ही उन्हें पाला पोसा था। जो लोग डायरेक्ट उनके रिश्ते में नहीं थे उन लोगों को तो सरकार को घेरना है चाहे मुद्दा कोई भी हो। उनका लक्ष्य केवल सरकार की आलोचना करना, सरकार के हर काम की निन्दा करना, उसे गलत बताना है। ताकि सरकार की छवि खराब हो…. लेकिन ये नासमझ हैं बदलती हवा में ये जनता का मन नहीं समझ पाए हैं। जनता इन ढोंगियों को अच्छी तरह समझ रही है और जितना ये हायतौबा मचा रहे हैं उतना उनका वोटबैंक कम हो रहा है।
जिस काम से जनता भारी खुश है उस पर भी ये लोग नेगेटिविटी फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे इनके वोट बढ़ जाएंगे ये उनके जीवन की सबसे बड़ी गलतफहमी साबित होगी।
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
mo. 9522170700