छत्तीसगढ़ प्रदेशदुर्ग

डैशबोर्ड पर दिखेगी सतत विकास के सूचकांकों पर किये गये कार्यों की प्रगति, दूसरे जिलों से स्थिति की तुलना भी कर पाएंगे

– जिलों की स्कोरिंग और रैंकिंग भी होगी जिससे पता लगेगा कि अब तक प्रदर्शन कैसा और लक्ष्य अभी कितना दूर

– सतत् विकास लक्ष्य ( एस. डी.जी.) की जिला स्तर पर मॉनिटरिंग हेतु तैयार किये डिस्ट्रिक्ट इंडिकेटर फ्रेमवर्क‘‘ पर दुर्ग में संभागीय प्रशिक्षण राज्य योजना आयोग द्वारा आयोजित 

– संभागीय जिलों के विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षण

– ‘‘डिस्ट्रिक्ट इंडिकेटर फ्रेमवर्क‘‘ से योजनाओं की मॉनिटरिंग में आयेगी कसावट

– ‘‘एस. डी. जी. डैशबोर्ड‘‘ से होगी जिलो की रैंकिंग

दुर्ग 19 दिसंबर 2022/ यूएन द्वारा वर्ष 2030 तक सतत विकास के लिए जो सूचकांक तैयार किये गये हैं उसकी प्रगति की मानिटरिंग के लिए छत्तीसगढ़ में राज्य योजना आयोग ने डैशबोर्ड तैयार किया है। डैशबोर्ड के बारे में एवं मानिटरिंग के लिए तैयार किये गये डिस्ट्रिक्ट इंडिकेटर फ्रेमवर्क पर आज संभागीय स्तर की कार्यशाला में विस्तार से जानकारी अधिकारियों को दी गई। राज्य योजना आयोग के अधिकारियों ने बताया कि डाटा के माध्यम से विश्लेषण करना अधिक आसान होता है कि सतत विकास के लिए हमारे द्वारा किये जा रहे विभागीय कार्य किस सीमा तक असरदायी साबित हो रहे हैं हमारे प्रदेश के अन्य जिलों में इसके लिए किये जा रहे कार्यों की स्थिति कैसी है। इंडीकेटर्स सामने होंगे तो अधिक बेहतर तरीके से समीक्षा हो पाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए बेहद जरूरी है कि विभागीय अधिकारी डैशबोर्ड का अवलोकन कर समीक्षा करते हुए अपने कार्य को और बेहतर करते जाएं, साथ ही डाटा संग्रहण के मामले में भी अधिक जागरूक रहें ताकि जमीनी स्थिति का सटीक प्रदर्शन डाटा के माध्यम से हो सके।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सदस्य – सचिव राज्य योजना आयोग श्री अनुप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एस.डी.जी. अर्थात सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल जो यूएन द्वारा निर्धारित किया गया है इसमें वर्ष 2030 तक दिये गये विकास संबंधी लक्ष्यों को पूरा करना है। यह लक्ष्य मैराथन की तरह हैं जिसे प्राप्त करना तब संभव है जब हम सटीक आंकड़ों के साथ अपनी प्लानिंग करेंगे। अपने लक्ष्यों की निगरानी के लिए हमारे पास बेहतर टूल होंगे। राज्य योजना आयोग द्वारा सभी विभागों के साथ मिलकर डिस्ट्रिक्ट इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है जिसे मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस साल के अगस्त महीने में जारी किया था। इसमें 82 तरह के इंडिकेटर्स हैं जिलों के कलेक्टर और सीईओ इसकी निरंतर मानिटरिंग करेंगे। इसमें जिलों की स्कोरिंग और रैंकिंग भी होगी जिससे जमीनी स्तर पर काम के नतीजे डैशबोर्ड के माध्यम से भी लक्षित हो सकेंगे।
इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ श्री अश्विनी देवांगन ने कहा कि राज्य योजना आयोग द्वारा तैयार किया गया ‘‘डिस्ट्रिक्ट इंडिकेटर फ्रेमवर्क‘‘ बहुत उपयोगी फ्रेमवर्क है, जो कि वैश्विक एस.डी.जी. लक्ष्यों को जिलों में प्रभावी रूप से लागू करने में सहायक होगा। इसके माध्यम से हमें मानिटरिंग के लिए आंकड़ों के बेहतर विश्लेषण का सुंदर प्लेटफार्म मिल सकेगा। यह हमारे लिए प्रभावी टूल साबित होगा। सीईओ ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया कि इसके लिए समयबद्ध रूप से पुष्ट आंकड़े ही प्रदान करें।
डॉ. नीतू गौरडिया, संयुक्त संचालक, राज्य योजना आयोग द्वारा “डी.आई.एफ.‘‘, ‘‘एस.डी.जी. डैशबोर्ड‘‘ तथा डाटा की महत्ता संबंध में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी गयी तथा प्रतिभागियों की पृच्छता का समाधान भी किया गया। कार्यक्रम में डीपीएसओ श्री डीएस वर्मा भी मौजूद रहे।

लक्ष्य विरुद्ध प्रगति की त्वरित जानकारी हो सकेगी डीआईएफ से-  डी.आई.एफ. में इंडिकेटर्स सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरणीय पहलुओं पर मुख्यतः केन्द्रित है, जिनमें प्रगति लाने से सामाजिक-आर्थिक विकास होना सुनिश्चित है। ‘‘एस.डी.जी. डैशबोर्ड” के माध्यम से प्रत्येक लक्ष्य विरूद्ध प्रगति की जानकारी त्वरित रूप से प्राप्त होगी, जिससे अपेक्षानुसार मिड कोर्स करेक्शन, संसाधनो का पुर्नवितरण कर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
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