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“लोगों के जीवन को बदलने के लिए जुनून, करुणा और मिशन का भाव दिखाएं” – उपराष्ट्रपति ने सिविल सेवकों से कहा

जो लोग उम्मीद खो चुके हैं, उन्हें खुशी देने से ज्यादा बड़ा पुरस्कार कुछ नहीं हो सकता – उपराष्ट्रपति

भारतीय डाक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की

New Delhi (IMNB). उपराष्ट्रपति  जगदीप धनखड़ ने आज युवा सिविल सेवकों से लोगों के जीवन को बदलने के लिए जुनून, करुणा और मिशन का भाव दिखाने का आह्वान किया। आज उप-राष्ट्रपति निवास में उनसे मुलाकात करने आए 2021 और 2022 बैच के भारतीय डाक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से उन्होंने कहा, “जो लोग उम्मीद तक खो चुके हैं उन्हें खुशी देने से ज्यादा बड़ा पुरस्कार और संतोष कुछ नहीं हो सकता है।”

श्री धनखड़ ने कहा कि भारत अभूतपूर्व ढंग से आगे बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के योगदान और हमारे मेहनती किसानों और श्रमिकों के प्रयासों की बदौलत भारत का ये उत्थान स्थायी है। भारत के वैश्विक उत्थान को अजेय बताते हुए उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि “सिर्फ एक दशक पहले तक हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में 10वें स्थान पर थे और अब हम पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं।”

युवा अधिकारी प्रशिक्षुओं को ‘विकास के दूत’ और ‘अमृत काल के योद्धा’ बताते हुए उन्होंने उनसे अपने नवाचारों और कौशल से बल पर भारत के विकास में तेजी लाने के लिए कहा। देश परिवर्तन के एक निर्णायक क्षण पर खड़ा है इस पर ज़ोर देते हुए उन्होंने सिविल सेवकों से आग्रह किया कि वे समावेशी विकास, वित्तीय समावेशन और सेवा वितरण में सुगमता को सुनिश्चित करें।

लोगों के बीच अनुशासन और राष्ट्रवाद के मूल्यों को विकसित करने का आह्वान करते हुए श्री धनखड़ ने सुझाया कि प्रत्येक डाकघर को मौलिक कर्तव्यों को प्रदर्शित और प्रचारित करना चाहिए। इससे नागरिकों के व्यवहार में बदलाव आएगा।

डाकिये को एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति और भूमि के हर भाग को जानने और कवर करने वाला बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंतिम छोर तक प्रभावी सेवा वितरण के लिए डाक विभाग के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों का उपयोग किया जाना चाहिए। सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में अपने दिनों को याद करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि वे हर रोज अपनी मां को एक पोस्टकार्ड लिखते थे।

श्रीमती (डॉ.) सुदेश धनखड़, उपराष्ट्रपति के सचिव श्री सुनील कुमार गुप्ता, महानिदेशक (डाक सेवाएं) श्री आलोक शर्मा, रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी (आरएकेएनपीए) के निदेशक श्री अंबेश उपमन्यु, आरएकेएनपीए के संकाय सदस्य और अन्य लोग इस बातचीत के दौरान उपस्थित थे।

कार्यक्रम के चित्र-

 

उपराष्ट्रपति का पूर्ण भाषण पढ़ने के लिए कृपया यहां क्लिक करें

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