“लोगों के जीवन को बदलने के लिए जुनून, करुणा और मिशन का भाव दिखाएं” – उपराष्ट्रपति ने सिविल सेवकों से कहा
जो लोग उम्मीद खो चुके हैं, उन्हें खुशी देने से ज्यादा बड़ा पुरस्कार कुछ नहीं हो सकता – उपराष्ट्रपति
भारतीय डाक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की
युवा अधिकारी प्रशिक्षुओं को ‘विकास के दूत’ और ‘अमृत काल के योद्धा’ बताते हुए उन्होंने उनसे अपने नवाचारों और कौशल से बल पर भारत के विकास में तेजी लाने के लिए कहा। देश परिवर्तन के एक निर्णायक क्षण पर खड़ा है इस पर ज़ोर देते हुए उन्होंने सिविल सेवकों से आग्रह किया कि वे समावेशी विकास, वित्तीय समावेशन और सेवा वितरण में सुगमता को सुनिश्चित करें।
लोगों के बीच अनुशासन और राष्ट्रवाद के मूल्यों को विकसित करने का आह्वान करते हुए श्री धनखड़ ने सुझाया कि प्रत्येक डाकघर को मौलिक कर्तव्यों को प्रदर्शित और प्रचारित करना चाहिए। इससे नागरिकों के व्यवहार में बदलाव आएगा।
श्रीमती (डॉ.) सुदेश धनखड़, उपराष्ट्रपति के सचिव श्री सुनील कुमार गुप्ता, महानिदेशक (डाक सेवाएं) श्री आलोक शर्मा, रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी (आरएकेएनपीए) के निदेशक श्री अंबेश उपमन्यु, आरएकेएनपीए के संकाय सदस्य और अन्य लोग इस बातचीत के दौरान उपस्थित थे।
कार्यक्रम के चित्र-



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