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वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की बेबाक कलम सीधे रस्ती की टेढ़ी चाल कौन कब मारे पलटी, चलता नहीं पता मांग है सियासत की, नहीं किसी की खता

जब भूपेश के दर पर मुर्मु
राष्ट्रपति के चुनाव में समर्थन लेने के लिये द्रोपदी मुर्मु भाजपा के विरोधियों के दर पर भी गयीं। बरसों से चुनावों से जुड़ा अनुभव कहता है कि वोट मांगने निकली टोली में ये चर्चा होती ही है कि ‘इसके घर जाएं या न जाएं, ये तो विरोधी है’। लेकिन बाद में वरिष्ठजन ये कहते हैं ‘हमें सबके पास जाना है। हर किसी से निवेदन करना है। चाहे वो अपने पक्ष का हो या विरोधी। पता नहीं कब कोई अपने नेता से नाराज चल रहा हो। उसे पलटाया जा सकता है’। छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता कांग्रेेस के नेताओं को रिझाने में कहीं भी पीछे नहीं रहे। एक किस्सा कांग्रेसी सांसद अरविंद नेताम का पार्टी के विरूद्ध जाकर राष्ट्रपति पद के लिये विपक्ष के प्रत्याशी को वोट करने का प्रसिद्ध है।

हाल ही मे जो माहौल दिखता रहा है उसमें साफ दिख रहा है कि विपक्षी पार्टी भाजपा कांगे्रसी दिग्गज टीएस सिंहदेव की ओर आस लगाए बैठी है।

कांग्रेसी दिग्गज अरविंद नेताम की बात करें तो…
5 दिसंबर 22 को याने दो-तीन महीने पीछे भानुप्रतापपुर उपचुनाव में सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी को खड़ा किया गया था। जिसमें कांगे्रस के नेता अरविंद नेताम ने भी इसके प्रत्याशी अकबर राम कोर्राम को समर्थन किया था। इस बात के लिये कांग्रेस पार्टी द्वारा अब अरविंद नेताम को नोटिस दिया गया है। साथ ही प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव अमरजीत भगत को भी नोटिस दिया गया है। भगत प्रदेश अध्यक्ष मोहन मकराम के गुट के समझे जाते हैं जिसके तार सीधे सिंहदेव से जुड़े हैं। कदाचित यही कारण है कि कांग्रेस के एक बड़े कार्यक्रम में लगाए गये बड़े-बड़े पोस्टरों में कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम की फोटो नहीं लगाई गयी। फिर शिकायत करने पर अलग से उसे चिपका दिया गया। यानि जिसे न पता हो उसे भी पता चल जाए कि पहले से नहीं लगाया गया और बाद में चिपकाया गया है। डबल बेइज्जती।
यूं शतरंज की चालें राजनीति का एक हिस्सा है इसमें कोई नयी बात नहीं है।
भाजपा ने मुद्दे को लपक लिया है और कहने से नहीं चूक रही कि भूपेश बघेल नेताम के साथ मरकाम को भी निपटाने पर तुले हैं। कहते हैं कि नेताम पांच बार सांसद रहे हैं और यदा-कदा धारा के विरूद्ध चलने के आदि हैं। बताया जाता है कि नेताम ने 2012 में राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी प्रणव मुखर्जी के बजाए विपक्ष के प्रत्याशी पीए संगमा को मतदान किया था। तब पार्टी ने 6 साल के लिये उन्हे निकाल दिया था। बाद में पार्टी में वापस लेने पर भी उन्होंने बगावती रूख जारी रखा और भूपेश बघेल की खिलाफत करते रहे। जिसकी परिणिति कारण बताओ नोटिस के रूप् में सामने आई है। अब देखना ये है कि नेताम और सिंहदेव को ठिकाने लगाने से बघेल को फायदा होगा या नुकसान…. । राजनैतिक पण्डितों को कहना है कि बघेल को फायदा और कांग्रेस को नुकसान।

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