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विश्व हिंदू परिषद की बैठक में हुआ निर्णय,बजरंग दल 30 सितंबर से14 अक्टूबर तक देश व्यापी शौर्य यात्रा निकलेगी लव जिहाद,धर्मांतरण जैसी समस्याओं से हिंदू समाज को लड़ने तैयार करेगी

रायपुर विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक रविवार को रायपुर में संपन्न हुई। बैठक के बारे में बताते हुए विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने बताया कि इसमें हिंदू परिवार व्यवस्था पर हो रहे चहुं तरफा प्रहारों तथा बढ़ती लव जिहाद व धर्मांतरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए एक व्यापक कार्य योजना बनी। ।    इसके अंतर्गत बजरंग दल आगामी 30 सितंबर से 14 अक्टूबर के बीच देशव्यापी शौर्य जागरण यात्राएं निकालेगा। इन यात्राओं के माध्यम से देश के हर कोने में रहने वाले हिंदुओं को संगठित कर उन्हें इन समस्याओं से निपटने में सक्षम बनाया जाएगा। दीपावली के आस- पास पूज्य संतों के देश व्यापी प्रवासों के मध्यम से जन-जन तक पहुंच बढ़ा कर व्यक्तियों को परिवारों से और परिवारों को सामाजिक व राष्ट्रीय जीवन मूल्यों से जोड़ा जाएगा।  दान देने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों के यथासंभव सहयोग के लिए तत्पर रहना हमारे परिवार का स्वभाव बनना चाहिए।

समाज निर्माण की दिशा में पूज्य साधु-संतों एवं धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक, वैचारिक संस्थाओं की सदैव महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। परिषद इन सबसे अनुरोध करती है कि वे परिस्थिति की गंभीरता को समझकर परिवार संस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करें। मनोरंजन जगत से जुड़े सभी पक्षों से यह आग्रह है कि वे समाज और परिवार को सुदृढ़ बनाने का सकारात्मक संदेश देने वाले चलचित्र एवं विविध कार्यक्रमों का निर्माण करें। वे मानव की निम्नतम प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन देने की जगह चारित्रिक विकास एवं दायित्वबोध निर्माण करने वाले कार्यक्रमों का निर्माण करें। इस सम्बन्ध में सेंसर बोर्ड एवं सरकारों को अपना दायित्व अधिक सतर्कता संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए। विहिप सभी सरकारों से अनुरोध करती है कि शिक्षा नीति बनाने से लेकर परिवार संबंधी कानूनों का निर्माण करते समय परिवार व्यवस्था को सुदृद्ध बनाने में अपना रचनात्मक योगदान दें। विश्व हिन्दू परिषद न्यायपालिका से भी अपेक्षा करती है कि वे परिवार से जुड़ी हुई व्यवस्था के संबंध में निर्णय देते समय परिवार और समाज को सुदृढ़ बनाने के अपने संवैधानिक दायित्व का अवश्य ध्यान रखें।

परिस्थतिजन्य विवशताओं के कारण एकल परिवार में रहने के लिए बाध्य हो रहे व्यक्ति भी अपने मूल परिवार के साथ सजीव संपर्क रखते हुए नियमित अन्तराल पर कुछ समय सामूहिक रूप से अवश्य बिताएं अपने पूर्वजों के स्थान से जुड़ाव रखना, अपनी जड़ों के साथ जुड़ने के समान है। इसलिए वहां विभिन्न गतिविधियां जैसे परिवार सहित एकत्रित होना, सेवा कार्य करना आदि आयोजित करने चाहिए। बालकों में पारिवारिक एवं सामाजिक जुड़ाव निर्माण करने के लिए उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय परिवेश में रह कर ही कराई जानी चाहिए। अपने निवास क्षेत्र में सामूहिक उत्सवों एवं कार्यक्रमों के द्वारा वृहद् परिवार का भाव निर्मित किया जा सकता है। बालकिशोरों के संतुलित विकास हेतु बाल संस्कार केन्द्र व संस्कारशाला आदि कार्यक्रम करना भी उपयोगी रहेगा। त्याग, संयम, प्रेम, आत्मीयता, सहयोग व परस्पर पूरकता से युक्त जीवन ही सुखी परिवार की आधारशिला है। इन विशेषताओं से युक्त परिवार ही सभी घटकों के सुखी जीवन को सुनिश्चित करेगा।

विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति समस्त समाज विशेषकर युवा पीढी का आह्वान करती है कि अपनी इस अनमोल परिवार व्यवस्था को अधिक से अधिक सजीव प्राणवान, संस्कारक्षम बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए

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