उत्तराखंड : हादसा और झारखंड में कोहराम, राज्य के 15 मजदूर लड़ रहे जिंदगी की जंग

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में रविवार की तड़के सुरंग में हादसा के बाद वहां करीब 40 मजदूर फंस गए हैं। इनमें 15 कामगार अकेले झारखंड के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं। इस घटना के बाद पूरे झारखंड में कोहराम मच गया है। सुरंग में फंसने वाले मजदूरों में तीन लोग रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के खीराबेड़ा गांव के निवासी हैं, जबकि दो लोग गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड के रहनेवाले हैं। वहीं छह अन्य लोग कोल्हान के निवासी हैं। समाचार लिखे जाने तक फंसे मजदूरों को निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी है। उत्तराखंड से मिली जानकारी के अनुसार सभी कामगारों को ट्यूब के माध्यम से खाना और पानी की आपूर्ति की जा रही है। फिलहाल सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
रविवार की सुबह देश भर में लोग दीपावली का त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे थे। उधर, उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के खीराबेड़ा गांव के तीन मजदूर सहित झारखंड के 15 कामगजारों के फंसने की सूचना मिली। घटना से पहले शनिवार को 70 मजदूर काम करने गए थे। घटना पहले शौच और अन्य काम के लिए कुछ लोग बाहर निकल गए थे। इसकी जानकारी फंसे मजदूरों के साथ काम करने गए खीराबेड़ा के नरेश बेदिया ने हिन्दुस्तान से बात करते हुए कही। उसने बताया कि सभी लोग सुरक्षित हैं, प्रशासन के लोग राहत कार्य में जुटे हैं। घटना की जानकारी ग्रामीणों को मिल गई है।
सुरंग में फंसे तीनों मजदूरों के घरवाले परेशान हैं। परिजनों को बताया गया है कि तीनों मजदूर ठीक हैं। फंसे मजदूरों में अधिकांश एक नवंबर को काम करने गए थे। खीराबेड़ा गांव से नौ मजदूर काम करने गए थे। इनमें छह मजदूर एक नवंबर को गए थे। सुरंग में फंसे अनिल बेदिया और राजेन्द्र बेदिया छह माह से अधिक समय से वहां काम कर रहे थे। इन्हीं दोनों मजदूरों ने काम करने के लिए अन्य को बुलाया था। सुरंग में फंसे अनिल बेदिया की मां का कहना है कि हमारे तीन पुत्र और एक पुत्री हैं। बड़ा बेटा अनिल उसके बाद सुनील और सिकंदर हैं। बड़ा बेटा अनिल पहले दूसरी जगह काम करता था। छह माह पहले उत्तराखंड गया था। कभी पैसे की जरूरत होती थी तो मांगने पर वह भेज देता है। भगवान से प्रार्थना करते हैं कि बेटा सही सलामत घर आए। वहीं राजेंद्र के पिता श्रवण बेदिया ने बताया कि इसी महीने की एक तारीख को बेटा काम करने के लिए गया था। भगवान बेटे को जल्द बाहर निकाले। वहीं सुखराम बेदिया के पिता बढ़न बेदिया कहां कि जब बेटा काम करने जा रहा था उसी समय मैंने रोका था, परंतु वह एक नवंबर को चला गया। सुखराम के भाई मनोज ने बताया कि उसके साथ काम कर रहे नरेश से बात हुई है उसने बताया है कि सभी ठीक हैं घबराने की कोई बात नहीं है।
टनल में कोल्हान के छह मजदूर फंसे हुए हैं, जो जिंदगी के लिए लड़ रहे हैं। सुरंग में फंसे मजदूरों में पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया प्रखंड के पांच और प. सिंहभूम के चक्रधरपुर के चेलाबेड़ा का एक मजदूर शामिल है। सभी को एनडीआरएफ की टीम निकालने में जुटी है। हादसे की खबर मिलते ही परिजन परेशान हो गए। उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। प. सिंहभूम के चेलाबेड़ा गांव का महादेव नायक भी सुरक्षित है। काम करने गए गांव के अन्य मजदूरों के साथ उसकी वॉकी-टॉकी से बात हुई, जिसके बाद साथियों ने फोन कर परिजनों को सूचना दी। भाई बोनो नायक के अनुसार महादेव नायक पहले भी उत्तराखंड काम करने गया था, तब वह लौट आया था। तीन महीने पहले ही गांव के राम बारला, वेंकट नायक और चंकी नायक के साथ फिर से उत्तराखंड गया था। वहीं सुरंग में फंसे डुमरिया प्रखंड के पांच मजदूर भी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। डुमरिया से लगभग आठ मजदूर छह महीने पहले काम करने के गए थे। अन्य मजदूरों ने बताया कि अंदर फंसे पांचों सुरक्षित हैं।
गिरिडीह के बिरनी प्रखंड के दो मजदूर भी उत्तराखंड के टनल में फंसे हुए हैं। एक मजदूर का नाम सुबोध कुमार वर्मा है और वह प्रखंड के सिमराढाब निवासी बुधन महतो का पुत्र है, जबकि दूसरा मजदूर केशोडीह निवासी विश्वसीजत कुमार वर्मा हैं। उसके पिता का नाम हेमलाल महतो है। इस घटना की सूचना जैसे ही गांव में पहुंची, लोग परेशान हो उठे और फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए भगवान से प्रार्थना करने लगे। केशोडीह निवासी हेमलाल महतो ने बताया कि विश्वजीत कुमार वर्मा पिछले डेढ़ साल से यमुनोत्री सुरंग में मिक्सचर मशीन के ऑपरेटर के रूप में काम कर रहा है। उसका एक बेटा और दो बेटियां हैं। वह सुबोध को भी काम करने अपने साथ ले गया था। सुबोध के पिता बुधन वर्मा और विश्वजीत दोनों आपस में साढ़ू हैं। सुबोध अपने पिता बुधन वर्मा का इकलौता पुत्र है। वह पिछले दो अगस्त को अपने मौसा के साथ उत्तराखंड गया था।
विश्वजीत कुमार, सुबोध वर्मा (दोनों गिरिडीह), अनिल बेदिया, राजेंद्र बेदिया, सुखराम (तीनों रांची के ओरमाझी), टिकू सरदार, गुनोधर, रनजीत, रवींद्र नायक, संतोष नायक (सभी पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया निवासी), महादेव नायक, पश्चिमी सिंहभूम, भुक्तू मुर्मू, बांकीसोल, चमरा उरांव, लरता कुर्रा, विजय होरो, गुमड लरता, गणपति खिदुआ, मुदुगामा कुर्रा।
उत्तराखंड में हुए टनल हादसे के बाद झारखंड के श्रमिकों को सहायता प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम उत्तराखंड रवाना हो गई है। टीम में जैप आईटी के सीईओ भुवनेश प्रताप सिंह, ज्वायंट लेबर कमिश्नर राजेश प्रसाद व प्रदीप रॉबर्ट लकड़ा शामिल हैं। अधिकारियों का दल फंसे श्रमिकों को आवश्यक सहायता प्रदान करने का काम करेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के श्रमिक भाइयों की मदद के लिए राज्य सरकार का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड भेजा गया है। टनल में फंसे हुए सभी श्रमिकों की कुशलता की कामना करता हूं।
