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राजस्थान में भाजपा किसे बनाएगी सीएम?

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों को एक के बाद एक दो झटके दिए हैं। दरअसल, पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से तीन (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान) में भगवा दल ने शानदार जीत दर्ज की है। लेकिन तीनों ही राज्यों में भाजपा बगैर सीएम फेस के चुनावी मैदान में थी। रिजल्ट आने के बाद सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा था कि भाजपा नए चेहरों को सीएम बना सकती है। अटकलबाजियों का दौर शुरू हो गया… लेकिन जब छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सीएम के नाम का ऐलान हुआ तो हर कोई हैरान हो गया। ऐसे में मंगलवार को राजस्थान में भाजपा पर्यवेक्षकों की विधायकों के साथ बैठक है। यह माना जा रहा है कि कल राजस्थान के सीएम का नाम फाइनल कर लिया जाएगा। तो क्या कल भाजपा तीसरा झटका देने वाली है? आइए समझते हैं…

रमन और शिवराज की विदाई
रविवार को छत्तीसगढ़ के सीएम के नाम का ऐलान किया गया। भाजपा ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया है। वो राज्य के एक बड़े आदिवासी नेता हैं। इस नाम के ऐलान के बाद छत्तीसगढ़ को उनका पहला आदिवासी सीएम मिल गया है। वहीं सोमवार को एमपी के लोगों का इंतजार खत्म हुआ। भगवा दल ने यहां मोहन यादव को सीएम बनाया है। इस नाम के ऐलान के बाद लोग तो हैरान थे ही खुद सीएम यादव भी हैरान थे। सीएम यादव ने ऐलान के बाद बताया कि वो मीटिंग में पीछे की लाइन में बैठे थे, अचानक उनके नाम का ऐलान कर दिया गया। मोहन यादव आरएसएस के करीबी माने जाते हैं। वो राज्य के बड़े ओबीसी नेता हैं। ऐसे में भाजपा ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश- दोनों ही राज्यों में नए चेहरों को सीएम बनाया है। हालांकि अगर सीएम रेस में सबसे आगे खड़े नेताओं की बात की जाए तो छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और एमपी में शिवराज सिंह चौहान का नाम माना जा रहा था। लेकिन भाजपा ने दोनों नेताओं को विदा कर दिया है।

अब वसुंधरा की बारी आई!
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के पैटर्न को देखते हुए यह कयास लगाया जा रहा है कि भाजपा राजस्थान में भी कुछ ऐसा ही करने वाली है। राजस्थान में सीएम रेस में सबसे आगे वसुंधरा राजे का नाम बताया जा रहा है। हालांकि अब यह माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व यहां भी किसी नए चेहरे को सीएम बना सकती है। सूत्रों के हवाले से यह बताया जा रहा है कि राजस्थान में 1+2 वाला फॉर्मूला अपनाया जाएगा। यानी एक मुख्यमंत्री के साथ, दो डिप्टी सीएम के नाम का ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा ने यही फॉर्मूला अपनाया है।

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