छत्तीसगढ़दुर्ग

संविदा शिक्षकों की चेतावनी: 1 अगस्त से प्रदेशव्यापी हड़ताल, सरकार को अल्टीमेटम

खबर No1…….दुर्ग | छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ ने सरकार को सीधी चेतावनी दे दी है—अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में शिक्षकों की कलमबंद हड़ताल होगी। दुर्ग में आयोजित संभाग स्तरीय बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया, जिसमें 200 से अधिक संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक की अगुवाई कर रहे संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने साफ कहा—“अब वक्त आ गया है निर्णायक संघर्ष का। सरकार को फैसला लेना ही होगा।”

 

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20 जुलाई को सभी जिलों में धरना, फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन

संघ की ओर से घोषित रणनीति के मुताबिक, पहला चरण 20 जुलाई को शुरू होगा। इस दिन सभी जिलों में शिक्षक धरना देंगे और जिला कलेक्टरों को अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपेंगे। यदि इसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 1 अगस्त से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत होगी।

बैठक में दिखी एकजुटता, हुआ संगठन विस्तार

बैठक में दुर्ग, बेमेतरा, खैरागढ़ सहित कई जिलों के शिक्षक जुटे। प्रदेश संरक्षक तापस रॉय, महासचिव उनीत राम साहू, संयुक्त सचिव कनकन हलदार, सह सचिव हरिओम शर्मा, प्रवक्ता विवेक राठौर और मीडिया प्रभारी सतीश यदु समेत प्रदेश कार्यकारिणी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
सभी ने स्पष्ट कहा—”अब कोई पीछे नहीं हटेगा, जब तक नियमितीकरण नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा।”

 

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नई ज़िम्मेदारियां, नई ऊर्जा

बैठक में संगठनात्मक विस्तार की भी घोषणा की गई:

अंकुर मिश्रा को खैरागढ़ का जिला अध्यक्ष बनाया गया।

अनिल कुमार खांडे बेमेतरा के नए जिला अध्यक्ष बने।

हरीशंकर चंदेल को दुर्ग संभाग का कोषाध्यक्ष एवं प्रवक्ता नियुक्त किया गया।

प्रदेश संयुक्त सचिव कनकन हलदार ने “वन-टू-वन” संवाद के ज़रिए उपस्थित सदस्यों की व्यक्तिगत समस्याएं भी सुनीं और उनके त्वरित समाधान का भरोसा दिया।

प्रदेश अध्यक्ष की दो टूक: मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन थमेगा नहीं

अपने समापन भाषण में प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने कहा,
“यह सिर्फ बैठक नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है। यदि सरकार ने संविदा शिक्षकों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो पूरा प्रदेश हमारी आवाज़ से गूंजेगा। हम हर मंच, हर स्तर तक जाएंगे।”

क्या है मुख्य मांग?

संघ की मुख्य और वर्षों से लंबित मांग है – संविदा शिक्षकों का शीघ्र नियमितीकरण। उनका कहना है कि स्वामी आत्मानंद जैसे महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक मिशन में कार्यरत शिक्षक जब तक अस्थायी रहेंगे, शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती रहेगी।

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