वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक कुर्सीनामा -1 किसको फिक्र है “कबीले”का क्या होगा
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, “लोग जिस्मों पे उतर आए हैं अब चलता बन , तू बहुत देर से पहुंचा है खिलौने वाले ।”
“ये क्या हाल बना रखा है , आखिर कुछ करते क्यों नही” कभी टीवी पर आने वाला यह विज्ञापन आज…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, कुर्सीनामा भाग 07
थोड़ा फ्री हुआ तो सोचा चलो आज आदिपुरुष के पाप को धोने रामानंद सागर जी की रामायण देख ली जाय…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, धरना प्रदर्शन और राजनीति में नेताओं को चुडियाँ भेंट करने की खबरे अक्सर सुर्ख़ियो बटोरती है
अक्सर देखने सुनने को मिलता है कि अमुक अधिकारी या नेता को फलाने फलाने ने चुडियाँ भेंट की या उनपर…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, करो योग रहो निरोग” स्लोगन कुछ सुना सुना सा लगता है
। अरे हाँ याद आया ये वही स्लोगन है जो सरकारी पुस्तक के किसी पन्ने में और विश्व योग दिवस…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, दुरंगी सरकार में “मटरू की बिजली का मन डोला” के बाद तिरंगी सरकार की “मीटर चालू बत्ती गुल” रिलीज हो गई है
दुरंगी सरकार में बिजली बिल से परेशान जनता जनार्दन को बिजली बिल हाफ का वादा कर सत्ता सुंदरी तक पहुची…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, हवा में रहने वाले सभी मित्रों को विश्व पर्यावरण दिवस पर ढेर सारी शुभकामनाएं ।
भाई आज विश्व पर्यावरण दिवस है तो पर्यावरण की चिंता में एसी कमरे में बैठ कर मुफ्त में कुछ ज्ञान…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, गोला बीड़ी के बण्डल और माखुर ये दोनों छत्तीसगढ़ी जीवनशैली में रच बस गए है
। छट्टी छेवारी , सामाजिक बैठक हो या शादी ब्याह आये हुए मेहमानों को ये नही दिए गए तो चार…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, कर नाटक चुनाव निपट गया किसी को सबक तो किसी की झोली में खुशियां बरसा गया ।
अबके बरस चुनाव में भगवान बजरंगबली भी कांग्रेस व भाजपा के बीच चकरघिन्नी बन घूमते रहे वैसे कुछ सालों से…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, कुर्सीनामा भाग 06
मित्रोओऊऊऊऊ का राग सुनते ही बच्चे कहने लगे है लो आ गए आपके गप्पू भाई अब सुनो उनके मन की…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, कभी तू छलिया लगता है , कभी दीवाना लगता है , कभी अनाडी लगता है , कभी आवारा लगता है , तू जो अच्छा समझे , ये तुझपे छोड़ा है ।
1991 में आई फ़िल्म “पत्थर के फूल ” में एसपी बालसुब्रामण्यम व लता मंगेशकर द्वारा गाना यह गान आज अचानक…
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