लेख-आलेख
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रामनवमी पर फसाद की टूल किट और उसके वायरस (आलेख : बादल सरोज)
🔵 खुश होना सहज इंसानी गुण है, प्रसन्नता मानवीय स्वभाव है ; बल्कि सही कहा जाए, तो उसकी जरूरत भी…
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वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की बेबाक कलम “टेक इट ईज़ी” भाता नहीं कांग्रेस का फुसलाना बहकाकर जीतने का गया जमाना
‘चांद दिखाकर बच्चे को बहलाया जा सकता है। पर बच्चे को दिखाकर चांद को नहीं… किसी साउथ की फिल्म में…
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हनुमान जी – साहस, शौर्य और समर्पण के प्रतीक लेख -प्रियंका सौरभ
हनुमान जी – साहस, शौर्य और समर्पण के प्रतीक हनुमान, जिन्होंने सीता देवी को दिखाने के लिए अपना हृदय खोल…
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वन संरक्षण कानून में संशोधन विधेयक: उदारीकरण और केंद्रीकरण की दिशा में आदिवासियों पर एक और हमला (आलेख : बृंदा करात, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)
भले ही सत्तारूढ़ पार्टी ने संसद में विपक्षी दलों के किसी भी हस्तक्षेप को रोका हो, लेकिन उसने बिना चर्चा…
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बदनाम होगा, तो भी राम का नाम होगा! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)
देखी, देखी, छद्म सेकुलरवालों की चालबाजी देखी! रामनवमी गुजरी नहीं कि आ गए एक बार फिर रामभक्तों को गुमराह करने।…
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डिग्री-मुक्त पीएमओ उर्फ़ हम डिग्री नहीं दिखाएंगे! (व्यंग्य आलेख : राजेंद्र शर्मा)
भाई, विरोधियों की ये तो सरासर बेईमानी है। जब मोदी जी-शाह जी एनआरसी ला रहे थे, तब क्या हुआ था,…
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, कभी तू छलिया लगता है , कभी दीवाना लगता है , कभी अनाडी लगता है , कभी आवारा लगता है , तू जो अच्छा समझे , ये तुझपे छोड़ा है ।
1991 में आई फ़िल्म “पत्थर के फूल ” में एसपी बालसुब्रामण्यम व लता मंगेशकर द्वारा गाना यह गान आज अचानक…
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पुरस्कारों का बढ़ता बाजार लेख प्रियंका सौरभ
पुरस्कारों के बढ़ते बाजार के में देने और लेने वाले दोनों कि भूमिका है। देने वाले अपने आप खत्म हो…
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भगोड़े को भगोड़ा मत कहो! (व्यंग्य : राजेन्द्र शर्मा)
अब तो विरोधियों को भी मानना पड़ेगा कि मोदी जी ने वाकई पूरी दुनिया में इंडिया का डंका बजवा दिया…
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हिंडेनबर्ग के हिस्ट्रीशीटर और उसके शरीके जुर्मों के लिए ओबीसी के कवच और ढाल की तलाश, (आलेख : बादल सरोज)
मोदी की भाजपा के न्यू इंडिया में सिर्फ नैरेटिव ही नहीं बदला ; बल्कि वर्तनी, मायने और मुहावरे भी बदल…
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