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एनटीपीसी ने बिहार के बाढ़ प्लांट के 660 मेगावाट की चौथी इकाई को सफलतापूर्वक किया कमीशन; बिहार को जल्द ही मिलेगा 383 मेगावाट अतिरिक्त बिजली

 बाढ़ प्लांट की उत्पादन क्षमता 1980 मेगावाट से बढ़कर 2640 मेगावाट हुआ
बाढ़ से बिहार को अब 1526 मेगावाट की जगह मिलेगी 1909 मेगावाट बिजली
बिहार में एनटीपीसी संयंत्रों से बिजली आवंटन 6560 मेगावाट से बढ़कर 6943 मेगावाट हो जाएगा;
बाढ़ के पहले चरण की 660 मेगावाट की दूसरी इकाई से जल्द ही होगा वाणिज्यिक परिचालन शुरू
यूनिट ने 72 घंटे का अनिवार्य फुल लोड ट्रायल-रन ऑपरेशन आज सफलतापूर्वक प्राप्त किया
   ■ अतीश दीपंकर, पटना, 30 जून |
केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) के मानदंडों के अनुसार एनटीपीसी बाढ़ के स्टेज-1 की दूसरी यूनिट आज दोपहर करीब 1बजे अपने 72 घंटे के फुल लोड ट्रायल-रन ऑपरेशन लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया ।
फुल लोड ट्रायल-रन ऑपरेशन के सफल होने का मतलब है कि, बाढ़ संयंत्र के स्टेज -1 की दूसरी इकाई आधिकारिक तौर पर वाणिज्यिक उत्पादन के लिए तैयार है,और इससे बिहार, ओडिशा, झारखंड और सिक्किम जैसे लाभार्थी राज्यों को 660 मेगावाट तक बिजली जल्द मिलने लगेगी ।
इसके साथ ही कुल अनुमानित 21000 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले बाढ़ प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता वर्तमान में 1980 मेगावाट से बढ़कर 2640 मेगावाट हो गई है।
पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में स्थित बाढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट की वर्तमान में 660 मेगावाट की 3 इकाइयों के माध्यम से कुल 1980 मेगावाट का वाणिज्यिक विद्युत उत्पादन हो रही है। बिहार को इस संयंत्र से अभी 1526 मेगावाट बिजली मिल रही है।
एनटीपीसी के प्रवक्ता विश्वनाथ चंदन ने बताया कि “ बाढ़ स्टेज- I की इस दूसरी यूनिट से उत्पादित बिजली का 58% हिस्सा यानी 383 मेगावाट बिहार को मिलेगा। शेष अन्य राज्य झारखंड, ओडिशा और सिक्किम को आवंटित किया जाएगा। उन्होने  बताया कि बाढ़ प्लांट की 660 मेगावाट पर्यावरण अनुकूल सुपर क्रिटिकल प्रौद्योगिकी आधारित यह चौथी इकाई है जो कि, आज सफल फुल लोड-ट्रायल ऑपरेशन (टीओ) के बाद इसकी जरूरी कमीशनिंग गतिविधियां पूरी की जा चुकी है ।
गौरतलब है कि बाढ़ सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के दूसरे स्टेज की 660 मेगावाट की दो इकाइयां ( यूनिट 4 और 5) क्रमश: 15 नवंबर, 2014 और 18 फरवरी, 2016 से बिजली का लगातार उत्पादन कर रही हैं। स्टेज एक की पहली 660 मेगावाट इकाई नवंबर 2021 से ही बिजली का वाणिज्यिक उत्पादन कर रही है ।
बाढ़ प्लांट के स्टेज एक की इस दूसरी यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू होने के साथ ही बिहार राज्य की बिजली क्षमता में 383 मेगावाट की वृद्धि होगी, अर्थात बाढ़ संयंत्र से बिहार को कुल बिजली आवंटन भी 1526 मेगावाट से बढ़कर 1909 मेगावाट तक पहुंच जाएगा। चंदन ने आगे कह कि “एनटीपीसी से बिहार के 6 उत्पादन संयंत्रों सहित एनटीपीसी से बिहार का वर्तमान बिजली आवंटन भी 6560 मेगावाट से बढ़कर 6943 मेगावाट पहुँच जाएगा।
बाढ़ स्टेज I की दूसरी इकाई के फुल लोड ट्रायल-रन ऑपरेशन की सफलता पर, एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पूर्व-1), डीएसजीएसएस बाबजी ने कहा कि ” टीम बाढ़ के पेशेवर और कैलिब्रेटेड प्रयासों के कारण ही  स्टेज 1 की दूसरी इकाई का सफल ट्रायल- ऑपरेशन संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए टीम बाढ़ को ढेर सारी बधाई । बाबजी ने आगे बताया कि, “ वर्तमान में एनटीपीसी की बिहार राज्य में लगभग 80 हज़ार करोड़ की निवेश के साथ कुल 6 परियोजनाओं में 9070 मेगावाट (मेगावाट) की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता है, जबकि 660 मेगावाट की क्षमता निर्माणाधीन है।
बाढ़ परियोजना के कार्यकारी निदेशक, असित दत्ता ने बाढ़ टीम को बधाई देते हुए कहा  कि, हमें टीम बाढ़ पर गर्व है, जिसने रिकॉर्ड समय में सभी एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर इस यूनिट के ट्रायल-रन ऑपरेशन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया है। श्री दत्ता ने कहा कि ‘पहले चरण की तीसरी और अंतिम इकाई का काम प्रगति पर है और इसके अगले साल तक पूरा होने की पूर्ण संभावना है।
इस उपलब्धि पल को संभव होते देखने के लिए एनटीपीसी और मेसर्स दुसान के वरिष्ठ अधिकारी भी बड़ी संख्या में बाढ़ प्लांट के यूनिट कंट्रोल रूम में उपस्थित थें।
गौरतलब है कि एनटीपीसी बिहार की औसत दैनिक बिजली मांग के 90% से अधिक बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करता है, जो 6,000 मेगावाट से 6,500 मेगावाट के आस-पास रहता है। बाढ़ प्लांट के स्टेज -I की दूसरी यूनिट के 660 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के जुडने के साथ ही, एनटीपीसी समूह की देश में कुल स्थापित क्षमता 73,000 मेगावाट से अधिक हो जाएगी, जिसमें 43 अक्षय और जल विद्युत परियोजनाओं सहित 89 विद्युत स्टेशन शामिल हैं।
एनटीपीसी समूह के पास 17 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से अधिक की विद्युत उत्पादन क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें 5.9 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं भी शामिल हैं।
 देश में काफी समय से सस्ती दरों पर पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से बिजली उत्पादित कर इसकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना ही एनटीपीसी की प्रमुख ताकत रही है।

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