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अभियान में अब तक 9 लाख स्वास्थ्य शिविर, 3.6 करोड़ लोगों की हुई जांच स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ : जेपी नड्डा

 नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को बताया कि ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ के तहत पूरे देश में अब तक 9 लाख स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं।

उन्होंने राजधानी में एक मीडिया कार्यक्रम में कहा कि इन शिविरों में अब तक 3.6 करोड़ से अधिक लोगों की उच्च रक्तचाप (Hypertension), मधुमेह (Diabetes), कैंसर और अन्य गैर-संक्रामक बीमारियों की जांच की जा चुकी है। नड्डा ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हुई थी और यह गांधी जयंती तक चलेगा। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2 तक यह आंकड़ा 4 करोड़ से ऊपर पहुँच सकता है।

देशभर के इन स्वास्थ्य शिविरों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) कैंसर, मुँह के कैंसर और एनीमिया की जांच की गई है। साथ ही, गर्भवती महिलाओं के लिए जांच, बच्चों को जीवन रक्षक टीके, और परिवारों को पोषण (Nutrition) पर सलाह भी दी गई।इसके अलावा, इन शिविरों में तपेदिक (Tuberculosis) और सिक्ल सेल डिजीज (Sickle Cell Disease) की जांच, रक्तदाता पंजीकरण और नए आयुष्मान/प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) कार्ड जारी किए गए।

नड्डा ने कहा कि पिछले दस साल में देश की स्वास्थ्य नीति में बदलाव हुआ है और 2014 के बाद से एक समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण (Holistic Health Approach) अपनाया गया है, जिसमें रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन, पहचान, इलाज और देखभाल शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में सरकार ने 1,79,000 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए हैं, जो 140 करोड़ नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ने का पहला कदम हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब किसी महिला को गर्भधारण होता है, तो ASHA कार्यकर्ता उनकी सेहत, जांच और देखभाल की जानकारी राज्य सरकार के साथ साझा करती हैं।

नड्डा ने यह भी कहा कि संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की दर अब 79% से बढ़कर करीब 90% हो गई है। इसका कारण ASHA कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन देना और हर मातृ प्रसव को मुफ्त बनाना है, जिसमें अस्पताल आने-जाने के लिए परिवहन की सुविधा भी सरकार द्वारा दी जाती है।अंत में उन्होंने पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए फिट इंडिया मूवमेंट, पोषण अभियान (POSHAN Abhiyan) और खेलो इंडिया जैसे स्वास्थ्य एवं जीवनशैली सुधार कार्यक्रमों का जिक्र किया और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता में सुधार और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता को भी सराहा।

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