
ज़ोहेब खान……..रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर रायपुर में संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल के आह्वान पर भारी बारिश के बीच मजदूरों और कर्मचारियों ने जोरदार रैली निकाली। रैली के माध्यम से केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं और निजीकरण की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया गया और 20 मई को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को छत्तीसगढ़ में भी सफल बनाने का ऐलान किया गया।
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मोतीबाग से निकली यह रैली छोटापारा, कोतवाली और निगम मुख्यालय होते हुए राजीव गांधी तिराहे पर आमसभा में तब्दील हुई। इस रैली में सैकड़ों की संख्या में श्रमिक शामिल हुए, जिन्होंने बैनरों, झंडों और नारों के माध्यम से केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध किया।
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सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियन नेताओं—धर्मराज महापात्र, चंद्रशेखर तिवारी, दिनेश पटेल, आशुतोष सिंह, हरिराम पाल, सुरेंद्र शर्मा और राजेश पराते—ने श्रम संहिता को वापस लेने, 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, समान काम का समान वेतन, ठेका प्रथा व आउटसोर्सिंग पर रोक, किसानों को फसल का वाजिब दाम, और महंगाई व बेरोजगारी पर नियंत्रण जैसी मांगें रखीं।
नेताओं ने केंद्र सरकार पर संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं थोपने से श्रमिकों को गुलामी की ओर ढकेला जा रहा है।
संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स, बीएसएनएल एम्पलाइज यूनियन, डाक कर्मचारी संघ, दवा विक्रेता संघ, इंश्योरेंस यूनियनों, एम्स यूनियन और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वी.एस. बघेल ने की।
सभा में निर्णय लिया गया कि 20 मई को “आजाद भारत की सबसे बड़ी हड़ताल” में छत्तीसगढ़ के श्रमिक भी भारी संख्या में भाग लेंगे, जिससे 20 करोड़ से अधिक मेहनतकश अपने अधिकारों की लड़ाई को नई गति देंगे।
