खास खबरछत्तीसगढ़ प्रदेशदुर्गलेख-आलेख

वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, कुर्सीनामा भाग 07

थोड़ा फ्री हुआ तो सोचा चलो आज आदिपुरुष के पाप को धोने रामानंद सागर जी की रामायण देख ली जाय टीवी का रिमोट हाथ मे लिया ही था कि बच्चे चिल्ला पड़े पापा लाओ रिमोट हमें दो हम आज नेताओ का झगड़ा वाला डिबेट शो न्यूज़ कार्यक्रम देखेंगे । उनकी फरमाइस सुन हकबका गया अरे आज कार्टून की जगह डिबेट क्या बात है बेटा बेटे ने कहा पापा स्कूल में वाद विवाद में राजनीति और जूतमपैजार विषय मिला है तो देखेंगे तभी तो सीखेंगे न ।
बेटे की बात को गुन ही रहा था कि मोदी और मोदी के खौफ से एक होते विपक्ष को देख ख्याल आया कि वाकई में आज देश की राजनीति किसी वाद से नहीं वरन वाद-विवाद के भरोसे चल रही है गांव की गली से लेकर संसद तक बे सिर पैर के मुद्दों से जनता बेवकूफ बनाई जा रही है कभी मन्दिर तो कभी हिन्दू मुस्लिम में उलझाई जा रही । हिदुत्व खा खून भी तब खौलता है जब समाने हरा रंग हो वरना तो आदिपुरुष भी 400 करोड़ से ऊपर कमाई कर ही लेती है ।
वाद विवाद से याद आया आजकल कबीरधाम की राजनीति में भी वाद विवाद झूमा झपटी नोटिस नोटिस का खेला खूब हो रहा है । राजनीतिक दलों में कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच वाद विवाद जूतमपैजार कोई नई बात नही है ये चुनाव के वक्त और अपने नेताओं के सामने शक्ति प्रदर्शन के दौरान देखने को मिल जाता है । इस बीमारी से कांग्रेस भाजपा और आप सभी पार्टियां पीड़ित है ।
चुनाव को लगभग 100 दिन ही बचे है और भाजपा की अंदरूनी खींचतान धीरे धीरे सड़क पे आने लगी है । कबीरधाम की भगवा राजनीति में एक नारी सब पर भारी पड़ने लगी है। उनकी एकला चलो की नीति से जिला संगठन हलकान परेशान है । अब उनका परेशान होना भी स्वाभाविक है , भाजापा की दरी उठाते उठाते यहाँ तक पहुंचे नेताओ का चिंतित होना स्वाभाविक है कि चंद साल पहले ही बेमेतरा से कबीरधाम की राजनीति में आ समाजसेवा में अपना झंडा गाड़ विधानसभा पहुंचने का ख्वाब देख रही नारी के समाज सेवा , जनसेवा लोगों तक पहुंचने की कला , धार्मिक आयोजन , धरना प्रदर्शन के जरिये शक्तिप्रदर्शन और तामझाम के मैजमेंट की भावना में लोग बहने लगे है । जन जन की आवाज और ऊपर वाले कि कृपा से कही टिकट मिल गई तो हमारा क्या । जिस नेता की जेब से कभी चवन्नी नही निकलती सिर्फ बैनर पोस्टर के सहारे नेतागिरी की दुकान सजाए बैठे है उन्हें औरों से ज्यादा तकलीफ है । एक नारी सब पर पड़ती भारी का असर ये है कि जिला अध्यक्ष द्वारा जिले के कुछ मंडल अध्यक्षो की नियुक्ति पर रातों रात राजधानी से आये स्थगन , कार्यकर्ताओ का कार्यालय में हंगामा , नियुक्ति और स्थगन से नाराज जिला कोर कमेटी सहित कईयों के इस्तीफे की खबरे भाजपाई गलियारों से छन कर आ रही है अब इन बातों में कितनी सच्चाई है ये तो नेता ही जाने फिलहाल तो बोड़ला मंडल में भी काफी नाराजगी कभी इस्तीफे के रूप में विस्फोटक हो सकती है । बहरहाल भाजपा में जनसेवा के नाम पर आगे बढ़ती नारी के हस्तक्षेप से नाराज कुछ जिला स्तर के नेता बरगद हिलाने का असफल प्रयास में लगे है ।
आपसी खींचतान के चलते कांग्रेस , आप की तरह बीजेपी भी बीमार दिखती है जिसे ह्यूब्रिस सिंड्रोम का शिकार कहा जा सकता है । यह एक तरह का व्यक्तित्व दोष है जिसमें कुर्सी या पद में बैठे व्यक्ति को ये लगता है कि उसे जबरदस्त समर्थन हासिल है और उसे कोई भी कुछ भी करने से रोक नहीं सकता है । 15 साल सत्ता की मलाई खाने के बाद तेज़ी से बढ़ रहे मनमानी और रायपुर दरबार मे हाजरी के बावजूद चेहरा देख कर कार्यवाही नोटिश की कार्यशैली से कह सकते हैं कि पार्टी कही रडरलेस ड्रिफ्ट सिंड्रोम से तो ग्रसित नही हो रही आम भाषा मे एक ऐसी नाव जो बिना पतवार के बहे जा रही हो । ये ऐसी बीमारी की वो किस्म है जिसमें कमांड और कंट्रोल, दोनों ताक़तें कमज़ोर हो जाती हैं । नतीजा लुंज-पुंज होता पार्टी संगठन । 100 दिन बचे चुनाव के मद्देनजर भाजपा को संगठन के महत्व को बचाये रखने कोर कमेटी के अस्तित्व को जताने के अलावा दरबार मे हाजरी लगाते विभीषणों से भी बचना होगा अन्यथा पब्लिक है कि सब जानती है ।
आगामी अंक में कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस में आखिर क्यों लड़ पड़ते है कांग्रेसी और नोटिस सिर्फ छोटे कार्यकर्ताओ बस को मिलती है बड़े नेताओं को छूट आखिर क्यों की पड़ताल ।
और अंत मे :-
जलवे बरकरार रखिए जनाब उनके लिए जो आपसे जलते है ,
यही तो वो लोग है जो आपके हौसलों को नई उड़ान देते है ।
#जय_हो 25 जून 2023 कवर्धा (छ.ग.)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button