“राजधानी रायपुर में तेल माफिया का खुलासा: मीडिया की दबिश पर भड़के अपराधी, पुलिस रही नदारद!”

ज़ोहेब खान…… रायपुर। राजधानी रायपुर में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहां धनेली स्थित रिंग रोड पर एक कबाड़ी कारोबारी के ठिकाने पर टैंकर से पेट्रोल और डीजल की चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई। मीडिया कर्मियों की सतर्कता से यह गोरखधंधा उजागर हुआ, लेकिन कवरेज के दौरान उन्हें और महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की गई।

सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि 112 पर कॉल करने के बावजूद कोई मदद नहीं पहुंची, जबकि कबाड़ियों के एक फोन पर सिलतरा चौकी से पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंच गए। इससे सवाल खड़ा होता है कि क्या अपराधियों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है?
मीडिया टीम को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि कबाड़ी उमेश साह के गोदाम पर लोहे के अवैध कारोबार के साथ-साथ पीडीएस का चावल भी गैरकानूनी रूप से जमा किया जा रहा है। जब मौके पर छापेमारी की गई तो वहां टैंकर से तेल निकाला जा रहा था, दूसरा टैंकर आते ही वापस भेज दिया गया, लेकिन पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया।
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छापे के दौरान गोदाम से हजारों क्विंटल अवैध लोहा और पीडीएस का सरकारी चावल भी बरामद हुआ। जिस चावल के लिए गरीब जनता घंटों लाइन में लगती है, वह बोरे के बोरे कबाड़ियों के पास मिले, जो शासन की योजनाओं पर सीधा तमाचा है।
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मीडिया कर्मियों ने लगातार सिलतरा चौकी प्रभारी को फोन किया, लेकिन रात 1 बजे तक कोई जवाब नहीं मिला। चौकी प्रभारी का फोन लगातार बिजी आता रहा, लेकिन एक भी कॉल रिसीव नहीं की गई। बाद में चौकी पहुंचकर मीडिया कर्मियों ने आवेदन देकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने केवल टैंकर और उसके ड्राइवर को हिरासत में लेकर खानापूर्ति कर दी, लेकिन गोदाम के अंदर चल रही भारी मात्रा में अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज कर दिया।
अब बड़ा सवाल यह उठता है — क्या राजधानी में इतने बड़े अवैध धंधे बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव हैं?
क्या सुशासन की बात करने वाली सरकार इन सवालों का जवाब देगी?




