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यूपी में जंगलराज — कभी नहीं! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)

भाई ये तो विरोधियों की सरासर ज्यादती है। अब यह तो सिंपल संयोग है कि जिस वक्त अमित शाह जी बिहार में फिर जंगल राज लगने का जोर-जोर से एलान कर रहे थे, उसी वक्त प्रयागराज में माफिया स्टाइल में दिन-दहाड़े, बीच सडक़ पर, एक चर्चित राजनीतिक हत्याकांड के मुख्य गवाह को, उसके सुरक्षाकर्मियों समेत गोली से उड़ा दिया गया। तीन से ज्यादा टोलियों में, आधे दर्जन से ज्यादा हमलावरों ने गोलियां चलाने के साथ डर और धुंआ फैलाने के लिए बम भी चलाए और आस-पास खड़े लोगों को भगाने के लिए, उनकी तरफ तमंचे भी लहराए। यानी शाह साहब जिस टैम जंगल राज को बिहार में खोज रहे थे, वह बाई मिस्टेक गंगा जी के उस पार प्रयाग राज में अटका रह गया। बस इत्ती सी बात के लिए विरोधी शाह जी से पूछ रहे हैं कि अगर बिहार में जंगल राज बा, तो यू पी में का बा! का बा, का बा क्या, यूपी में बाबा, और क्या?

और उसके बाद तो बाबा ने ऐन एसेंबली में बाकायदा एलान भी कर दिया : गुंडों-माफिया को मिट्टी में मिला देेंगे! जब बिना अमृतकाल के पांच साल वह यूपी में गुंडों-माफिया को मिट्टी में मिलाने में नहीं चूके तो, अमृतकाल में उन्हें मिट्टी में मिलाने कैसे चूक जाएंगे। वैसे भी अमृतकाल कौन सा सिर्फ पांच साल का है, पूरे पच्चीस साल चलेगा। हड़बड़ी की भी क्या जरूरत है, बाबा जी मिट्टी में मिलाते रहेंगे, आराम से। अमृतकाल में माफिया अमर भी हो जाएं तो क्या, बाबा जी और उनकी कुर्सी भी तो अमर होंगे। चलता रहेगा देव-असुर युद्घ, अमृतकाल के आखिर तक! पर यूपी की छोड़ो, प्रयागराज तक में जंगल राज नहीं घुस सकता है। इसीलिए तो बाबा ने पहले ही उसका नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया है। प्रयागराज में तो पहले ही ‘राज’ लगा हुआ है, फिर वहां कोई और राज कैसे आ सकता है? हां! जब तक इलाहाबाद था, तब तक बात दूसरी थी। मुस्लिम नाम, ऊपर से राज की जगह खाली! अब प्रयागराज वालों को पता चल रहा है कि बाबा जी ने नाम बदलवा कर, जंगल राज से उनके बचाव का कैसा पक्का इंतजाम कर दिया है। हम तो कहते हैं कि योगी जी को लखनऊ वगैरह सभी जगहों के नाम बदलकर, उनके साथ राज जोड़ देना चाहिए, जिससे यूपी में जंगल राज के लिए कहीं जगह ही नहीं बचे।

और जो नेहा राठौर को यूपी में का बा-2 गाने के लिए पुलिस के नोटिस को, जंगल राज से जोडऩे की कोशिश कर रहे हैं, उनकी अक्ल पर तो तरस ही खाया जा सकता है। सोचने की बात है –पुलिस की कार्रवाई में, जंगल राज कैसे हो सकता है? पुलिस की कार्रवाई में भी जंगल राज होने लगे, तो कानून का राज किसे कहेंगे? पुलिस की कार्रवाई में जंगल का कानून हो सकता है, पर जंगल के कानून का राज हुआ तब भी, राज तो कानून का ही कहा जाएगा। बल्कि यूपी में तो कानून का राज भी कुछ फालतू ही है, जो नेहा राठौड़ से बाबा जी की पुलिस ने सिर्फ जवाब-तलब किया है। वर्ना कानून के राज में देश की राजधानी में तो पवन खेड़ा को, पीएम का नाम लेने में गलती करने के लिए सीधे गिरफ्तार किया गया था। वह तो ऊंची अदालत बीच में आ गयी वर्ना कानून का राज खेड़ा को सीधे हवाई जहाज से उतारकर, हजारों किलोमीटर दूर किसी जेल में ले गया होता। पर किसी ने राजधानी में मो-शा जी के राज को, जंगल राज बोला क्या? फिर यूपी में तो पुलिस ने नेहा राठौड़ को सिर्फ नोटिस दिया है, वहां जंगल राज कैसे हो सकता है!? जंगलराज तो सिर्फ बिहार में और ऐसे ही दूसरे राज्यों में भी हो सकता है, जहां भगवा पार्टी को अपोजीशन में बैठना पड़ रहा हो।

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