देश-विदेश

जेलों से रिहा हुए मछुआरे पहुंचे चेन्नई हवाईअड्डे, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया

श्रीलंका की जेलों से रिहा हुए 15 मछुआरे मंगलवार को चेन्नई हवाईअड्डे पहुंचे। 18 नवंबर को, श्रीलंकाई नौसेना ने 22 मछुआरों सहित दो देशी नावों को कथित तौर पर मछली पकड़ने के आरोप में पकड़ लिया और उनसे पूछताछ की थी।

हालांकि, पारंपरिक मछुआरों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और इन मछुआरों की रिहाई का अनुरोध किया। बता दें कि ये 22 मछुआरे तमिलनाडु के रामेश्‍वरम से है, जो अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में भटक गए थे।

वित्त मंत्री ने विदेश सचिव और श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग से बात की, जिसके बाद मछुआरों को बचाया गया। जैसे ही मछुआरे भारत लौटे, मछुआरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया। सीतारमण ने मछुआरों के परिवारों को आश्वस्त किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हमेशा तमिलों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है।

इससे पहले 29 अक्टूबर को, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों की बार-बार गिरफ्तारी के मुद्दे पर प्रकाश डाला था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे मछुआरे आजीविका के लिए पूरी तरह से मछली पकड़ने की गतिविधि पर निर्भर हैं और इन लगातार गिरफ्तारियों से मछुआरा समुदाय को भारी परेशानी और पीड़ा हो रही है। श्रीलंकाई नौसेना के ऐसे कृत्यों ने राज्य में मछुआरा समुदायों के मन में दबाव और दहशत पैदा कर दी है।’

स्टालिन ने पाक खाड़ी क्षेत्र में तमिलनाडु के मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की रक्षा करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अकेले अक्टूबर महीने में श्रीलंकाई नौसेना ने मछली पकड़ने वाली 10 नौकाओं और तमिलनाडु के 64 मछुआरों को पकड़ा था।

स्टालिन द्वारा लिखे गए पत्र में आगे लिखा गया कि ‘मैं बताना चाहता हूं कि तमिलनाडु के मछुआरों को लगता है कि उनकी आवाज कम हो रही है और मुझे लगता है कि भारत सरकार को हमारे मछुआरों के अधिकारों के लिए और अधिक मुखरता से खड़ा होना चाहिए और उनकी सुरक्षा के लिए बोलना चाहिए। मैं पाक खाड़ी क्षेत्र में हमारे मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की रक्षा करने की मांग भी दोहराना चाहूंगा।’

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