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छत्तीसगढ़ सरकार ने छीना चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पदोन्नति अधिकार: विजय झा

नई अधिसूचना से तृतीय श्रेणी पदोन्नति में जोड़ी गई कंप्यूटर डिग्री की शर्त, कर्मचारी संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी

ज़ोहेब खान……..रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा हाल ही में जारी राजपत्र अधिसूचना ने प्रदेश के हजारों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में आक्रोश उत्पन्न कर दिया है। अधिसूचना में चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी (लिपिकीय संवर्ग) में पदोन्नति के लिए अब कंप्यूटर डिग्री को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे वे कर्मचारी जो वर्षों से इस पदोन्नति की प्रतीक्षा में थे, अब पात्र नहीं रह गए हैं।

 

कर्मचारी नेता विजय कुमार झा ने इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह अधिसूचना पिछले 25 वर्षों से चली आ रही एक सकारात्मक व्यवस्था को खत्म करती है, जिसके तहत हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण और 5 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को लिपिकीय पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति द्वारा चयनित किया जाता रहा है।

 

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श्री झा ने बताया कि कर्मचारियों के लंबे संघर्ष के बाद पहले यह प्रतिशत 10% था जिसे बढ़ाकर 25% किया गया था। पहले इस प्रक्रिया में कंप्यूटर या मुद्रलेखन परीक्षा पास करने की कोई बाध्यता नहीं थी, लेकिन अब मान्यता प्राप्त संस्था से कंप्यूटर डिग्री की अनिवार्यता जोड़ दी गई है।

 

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उन्होंने कहा कि यह शर्त प्रदेश के हजारों कर्मचारियों के लिए अव्यावहारिक है, क्योंकि उन्होंने अपनी सेवा की शुरुआत पुराने नियमों के तहत की थी और अब अचानक उनके अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। इसके अलावा, अधिसूचना में अन्य उच्च पदों के लिए भी योग्यता में वृद्धि कर दी गई है, जिससे ग्रेजुएशन, डिप्लोमा और साइंस/कंप्यूटर साइंस की डिग्रियों की शर्तें जोड़ी गई हैं।

श्री झा ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए और कर्मचारियों को उनके कार्यानुभव एवं पूर्व निर्धारित मानदंडों के आधार पर पदोन्नति का अधिकार दिया जाए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ, प्रदेश अध्यक्ष बिन्देसरी राम रौंतिया के नेतृत्व में आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

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